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घंटे के हिसाब से मिल रहा है 'पार्टनर'! भारत में शुरू हुई ऐसी सर्विस जिसने मचा दी सनसनी, जानिए पूरा मामला



नई दिल्ली। बदलती जीवनशैली, बढ़ती भागदौड़ और महानगरों में बढ़ते अकेलेपन के बीच भारत में एक नई तरह की ऑनलाइन सर्विस चर्चा का विषय बन गई है। अब कुछ प्लेटफॉर्म ऐसे मॉडल के साथ सामने आ रहे हैं, जहां लोग कुछ घंटों के लिए एक प्रोफेशनल साथी (पार्टनर) बुक कर सकते हैं। शॉपिंग, मूवी, किसी सामाजिक कार्यक्रम में शामिल होने या सिर्फ बातचीत और साथ समय बिताने जैसे उद्देश्यों के लिए यह सेवा उपलब्ध कराई जा रही है। इस नए ट्रेंड ने सोशल मीडिया से लेकर आम लोगों के बीच रिश्तों, नैतिकता और समाज के भविष्य को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

बताया जा रहा है कि कुछ वेबसाइटों के माध्यम से ग्राहक अपनी जरूरत के अनुसार समय के हिसाब से साथी बुक कर सकते हैं। वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह सेवा केवल सामाजिक साथ देने तक सीमित है और इसके लिए स्पष्ट नियम बनाए गए हैं।

आखिर क्या है यह नई सर्विस?

इस तरह की सेवाओं में ग्राहक वेबसाइट या मोबाइल प्लेटफॉर्म पर जाकर अपनी पसंद के अनुसार उपलब्ध प्रोफेशनल पार्टनर का चयन कर सकते हैं। इसके बाद तय समय और स्थान पर दोनों मिलते हैं। इस दौरान वे साथ में शॉपिंग कर सकते हैं, किसी कैफे में बैठ सकते हैं, फिल्म देख सकते हैं, किसी समारोह में शामिल हो सकते हैं या सामान्य बातचीत कर सकते हैं।

इन प्लेटफॉर्मों का दावा है कि यह पूरी तरह प्रोफेशनल सेवा है और इसका उद्देश्य केवल सामाजिक साथ उपलब्ध कराना है। किसी भी प्रकार की गैर-कानूनी गतिविधि या शारीरिक संबंध की अनुमति नहीं होती तथा सेवा के लिए निर्धारित नियमों का पालन करना दोनों पक्षों के लिए अनिवार्य बताया जाता है।

युवाओं के बीच तेजी से बढ़ रही लोकप्रियता

महानगरों में नौकरी करने वाले युवाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। कई लोग अपने परिवार से दूर रहते हैं और उनके पास सामाजिक दायरा सीमित होता है। ऐसे में अकेलापन, मानसिक तनाव और सामाजिक आयोजनों में अकेले जाने की झिझक जैसी समस्याएं सामने आती हैं।

ऐसे कई युवा इस तरह की सेवाओं को सुविधाजनक विकल्प के रूप में देख रहे हैं। उनका मानना है कि यदि किसी कार्यक्रम में साथ जाने वाला कोई मित्र या परिचित उपलब्ध नहीं है, तो प्रोफेशनल साथी की सेवा ली जा सकती है।

एक उपयोगकर्ता ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि आज के समय में नए दोस्त बनाना आसान नहीं रह गया है। ऐसे में यदि सम्मानजनक तरीके से किसी के साथ समय बिताने का विकल्प उपलब्ध है तो इसमें गलत नहीं माना जाना चाहिए।

सोशल मीडिया पर लोगों ने साझा किए अनुभव

इस तरह की सेवाओं को लेकर सोशल मीडिया पर अनेक अनुभव साझा किए जा रहे हैं। कुछ लोगों ने ग्राहक के रूप में अपने अनुभव बताए हैं, जबकि कई लोग ऐसे भी हैं जो स्वयं इस सेवा का हिस्सा बनकर काम कर रहे हैं।

एक युवती ने बताया कि वह कई बुकिंग के माध्यम से अच्छी आय अर्जित कर लेती है। उसके अनुसार अधिकांश ग्राहक केवल किसी कार्यक्रम में साथ जाने, बातचीत करने या शहर घूमने के लिए बुकिंग करते हैं।

उसने कहा कि उनका काम केवल सम्मानजनक व्यवहार करते हुए ग्राहक का साथ देना होता है। सेवा के नियम स्पष्ट हैं और किसी भी प्रकार की अनुचित मांग स्वीकार नहीं की जाती।

संस्थापक का दावा—सुरक्षा हमारी पहली प्राथमिकता

इस प्रकार की सेवाएं उपलब्ध कराने वाले प्लेटफॉर्मों का कहना है कि उन्होंने सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। उनका दावा है कि प्रत्येक पार्टनर का बैकग्राउंड वेरिफिकेशन, पहचान पत्र की जांच और अन्य आवश्यक सत्यापन प्रक्रियाएं पूरी की जाती हैं।

साथ ही ग्राहकों की पहचान भी सत्यापित की जाती है ताकि दोनों पक्ष सुरक्षित रहें। कई प्लेटफॉर्म सुरक्षा प्रोटोकॉल, आपातकालीन सहायता और शिकायत निवारण जैसी सुविधाओं का भी दावा करते हैं।

हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी ऑनलाइन सेवा का उपयोग करते समय उपयोगकर्ताओं को स्वयं भी सतर्क रहना चाहिए और प्लेटफॉर्म की शर्तों तथा सुरक्षा व्यवस्था को अच्छी तरह समझ लेना चाहिए।

समाज में छिड़ी नई बहस

जहां एक वर्ग इस सेवा को आधुनिक जीवन की जरूरत बता रहा है, वहीं दूसरा वर्ग इसे रिश्तों के व्यावसायीकरण के रूप में देख रहा है।

आलोचकों का कहना है कि दोस्ती, साथ और भावनात्मक संबंध जैसी चीजें अब किराए पर मिलने लगी हैं, जिससे सामाजिक मूल्यों पर असर पड़ सकता है। उनका मानना है कि यदि रिश्ते भी सेवा बन जाएंगे तो भविष्य में वास्तविक मानवीय संबंध कमजोर हो सकते हैं।

दूसरी ओर समर्थकों का तर्क है कि यदि दो वयस्क अपनी सहमति से पूरी तरह कानूनी और पेशेवर तरीके से किसी सामाजिक गतिविधि के लिए साथ समय बिताते हैं, तो इसे गलत नहीं कहा जा सकता।

परिवारवादी सोच रखने वाले लोगों की चिंता

परिवार और पारंपरिक सामाजिक मूल्यों को महत्व देने वाले कई लोगों ने इस ट्रेंड पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि समाज में पहले से ही व्यक्तिगत रिश्तों में दूरी बढ़ रही है। ऐसे समय में किराए पर साथी जैसी सेवाएं भावनात्मक संबंधों को और कमजोर कर सकती हैं।

उनका मानना है कि युवाओं को वास्तविक मित्रता, परिवार और सामाजिक संबंधों को मजबूत करने पर अधिक ध्यान देना चाहिए, क्योंकि लंबे समय तक मानसिक संतुष्टि और भावनात्मक सहयोग इन्हीं रिश्तों से मिलता है।

विदेशों में पहले से मौजूद है यह मॉडल

ऐसी सेवाएं भारत में नई जरूर हैं, लेकिन दुनिया के कई देशों में यह मॉडल पहले से मौजूद है। चीन, जापान और अमेरिका सहित कई देशों में लोग सामाजिक आयोजनों, पारिवारिक कार्यक्रमों या अकेलेपन को कम करने के उद्देश्य से प्रोफेशनल साथी की सेवाएं लेते रहे हैं।

विशेष रूप से जापान में अकेलेपन की समस्या को देखते हुए इस प्रकार की सेवाओं ने काफी लोकप्रियता हासिल की थी। वहीं अमेरिका और चीन में भी विभिन्न प्लेटफॉर्म अलग-अलग श्रेणियों में सामाजिक साथी उपलब्ध कराते हैं।

अब भारत में भी शहरी क्षेत्रों के युवा इस मॉडल को अपनाने लगे हैं, हालांकि इसकी स्वीकार्यता अभी भी सीमित है और इस पर व्यापक सामाजिक बहस जारी है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

सामाजिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह ट्रेंड केवल एक व्यावसायिक सेवा नहीं बल्कि बदलती जीवनशैली का संकेत भी है। तेजी से बढ़ता शहरीकरण, व्यस्त दिनचर्या, डिजिटल जीवन और सीमित सामाजिक संपर्क ने लोगों के व्यवहार में बड़ा बदलाव लाया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ऐसी सेवाएं पूरी तरह कानूनी, पारदर्शी और सुरक्षित नियमों के तहत संचालित होती हैं, तो उन्हें केवल सामाजिक बदलाव के एक रूप के तौर पर देखा जा सकता है। वहीं यह भी आवश्यक है कि लोग वास्तविक रिश्तों, परिवार और मित्रता के महत्व को कम न आंकें।

भविष्य में और बढ़ सकता है यह ट्रेंड

डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते प्रभाव और बदलती सामाजिक जरूरतों को देखते हुए माना जा रहा है कि आने वाले वर्षों में इस तरह की सेवाओं की मांग और बढ़ सकती है। हालांकि इसके साथ सुरक्षा, गोपनीयता, नैतिकता और सामाजिक प्रभाव जैसे मुद्दों पर भी लगातार चर्चा होती रहेगी।

फिलहाल इतना तय है कि किराए पर साथी उपलब्ध कराने वाली सेवाओं ने भारत में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। एक ओर युवा इसे सुविधा और आधुनिक जीवनशैली का हिस्सा मान रहे हैं, जबकि दूसरी ओर समाज का बड़ा वर्ग इसे रिश्तों के बदलते स्वरूप का चिंताजनक संकेत मान रहा है। आने वाले समय में यह ट्रेंड किस दिशा में जाएगा, यह समाज की स्वीकार्यता, कानूनी व्यवस्था और लोगों की सोच पर निर्भर करेगा।

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